MANAV DHARM

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Saturday, December 18, 2010

bhajan--ganga..!


सदगुरुजी  मेरी  नैया  के  पतवार..!
सदगुरु  है  माता..सदगुरु  पिता  है..सदगुरु  है  पालन--हार..!
जग  में  आया  नर--तन  पाया..सबने  है  यह  सुन्दर  जीवन  बताया..!
यह  है  मुक्ति  का  द्वार..सदगुरुजी  मेरी  नैया  के  पतवार....!!
समय  के  सदगुरु  और  ज्ञान  के  दाता..शरण  में  उनकी  जो  भी  आता...
कर  देते  उद्द्वार...सदगुरुजी  मेरी  नैया  के  पतवार..!!
शब्द--ब्रह्म  का  बोध  कराया..दिव्य  दृष्टि  दे  रूप  लखाय..
पिला  के  अमृत--धार....सदगुरुजी  मेरी  नैया  के  पतवार..!!
अनहद--धुन  को  घट  में  सुनाया..सेवा--भक्ति  का  पाठ  सिखाया..
गोपाल  के  प्राण  आधार....सदगुरुजी  मेरी  नैया  के  पतवार...!!!!
सदगुरु  है  माता..सदगुरु  पिता  है..सदगुरु  है  पालन--हार..!!

1 comment:

  1. सत्य की खोज करनी है तो सबसे पहले समय के तत्वदर्शी महान--पुरुष को खोजो..!
    !!जब तक सत्य को तत्वतः नहीं जान सकते ..तब तक सत्य की खोज आढी--अधूरी ही है..!!
    जो सत्य को तत्त्व से जान लेता है वह तत्वदर्शी हो जाता है..!
    तत्वदर्शी ही ग्यानी है..

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