MANAV DHARM

MANAV  DHARM

Friday, March 11, 2011

"रे मन..धीरज क्यों न धरे..?

सूरदास जी कहते है..
"रे मन..धीरज क्यों न धरे..?
संवत दो हजार के ऊपर ऐसा योग परे..!
पूरब-पश्चिम,-उत्तर-दक्षिण..चहु दिसि काल घिरे..!
अकाल मृत्यु व्पाये जग माहि प्रजा बहुत मरे..!
काल-व्याल से वही बचेगा..जो "हंस" का ध्यान धरे..!!
......रे मन धीरज क्यों न धरे.........!!
..तो आज हम देख ही रहे है..चारो तरफ..दैवी--आपदाए..लड़ाई--झगड़े..मार--काट..आतंक..महारोग--मानव की जान लीलते जा रहे है..!
..बस एक ही राता है..."हंस" का ज्ञान प्राप्त करके उसका ध्यान करना..!जो प्रभु के अविनाशी नाम को जनता और उसका भजन सुमिरन-ध्यान करता है..वह ही इन विपदाओं से बच पाटा है..क्योकि..वह गोवर्धन की छात्र-छाया में आ जाता है..!!

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